कालसर्प दोष शांति पूजा
कुंडली के सभी 12 प्रकार के कालसर्प योगों की संपूर्ण शांति। शुद्ध चांदी के नाग-नागिन जोड़े की प्रतिष्ठा, राहु-केतु मंत्र जाप, रुद्राभिषेक एवं पूर्णाहुति हवन।
उज्जैन के वैदिक पंडित विष्णु पाठक जी से संपर्क कर पूजा की प्रामाणिक विधि, शुभ मुहूर्त, आवश्यक पूजन सामग्री एवं पारदर्शी दक्षिणा की संपूर्ण जानकारी प्राप्त करें।
(Speak directly with Vedic Pandit Pt. Vishnu Pathak for ritual procedures, auspicious muhurat, and transparent dakshina details.)
पूजा की सही विधि, शुभ मुहूर्त एवं पारदर्शी दक्षिणा जानने के लिए अभी सीधे कॉल अथवा व्हाट्सएप करें।
पंडित विष्णु पाठक जी से 7722958543 पर सीधे बात करें। कोई बिचौलिया या एजेंसी कमीशन नहीं।
Speak directly with Pandit Ji without middlemen.उज्जैन के सिद्ध पीठों में पूजा: मंगल भात पूजा हेतु मंगलनाथ मंदिर एवं कालसर्प व पितृ कर्म हेतु पवित्र शिप्रा रामघाट।
Performed at sacred consecrated shrines.भारत व विदेश से आने वाले भक्तों के लिए शुभ मुहूर्त चयन, पूजन सामग्री एवं ठहरने (धर्मशाला) का उचित मार्गदर्शन।
Full travel, stay and ritual guidance for all devotees.Vedic Puja & Ritual Services in Ujjain — संपूर्ण वैदिक संकल्प, वेदोक्त मंत्रोच्चार एवं विधि-विधान से संपन्न
कुंडली के सभी 12 प्रकार के कालसर्प योगों की संपूर्ण शांति। शुद्ध चांदी के नाग-नागिन जोड़े की प्रतिष्ठा, राहु-केतु मंत्र जाप, रुद्राभिषेक एवं पूर्णाहुति हवन।
मंगल ग्रह की उत्पत्ति स्थली श्री मंगलनाथ मंदिर में शिवलिंग पर पके हुए भात (चावल), कुमकुम एवं लाल पुष्पों से विशेष अभिषेक कर मंगल के उग्र प्रभाव को शांत किया जाता है।
कुंडली में 1, 4, 7, 8 या 12वें भाव में मंगल के प्रभाव से विवाह में आ रही देरी, संबंधों में तनाव या वैवाहिक जीवन की बाधाओं के निवारण हेतु वैदिक विधान।
अग्नि तत्व मंगल और छाया ग्रह राहु की युति से उत्पन्न क्रोध, कलह, व्यापारिक हानि या दुर्घटना भय के निवारण हेतु वैदिक समन्यवय शांति एवं हवन।
भगवान महाकालेश्वर की पावन नगरी में रुद्राष्टाध्यायी वैदिक मंत्रों से पंचामृत एवं गंगाजल अभिषेक। आरोग्य, दीर्घायु, मानसिक शांति एवं संकट निवारण हेतु।
पवित्र शिप्रा नदी के रामघाट एवं सिद्धवट तीर्थ पर पितृ तृप्ति एवं वंश वृद्धि हेतु वैदिक तर्पण, पिंडदान, त्रिपिण्डी श्राद्ध एवं नारायण बलि कर्म।
वैदिक ज्योतिष में जब जन्म कुंडली में सभी सात प्रमुख ग्रह (सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि) छाया ग्रह राहु और केतु के मध्य आ जाते हैं, तब कालसर्प योग का निर्माण होता है।
भगवान महाकालेश्वर की पावन नगरी उज्जैन, जिसे काल गणना का केंद्र माना जाता है, इस दोष के निवारण हेतु भारत का सर्वाधिक सिद्ध तीर्थ है। यहां की गई पूजा से मानसिक संताप, कार्यों में विघ्न और जीवन के अवरोध दूर होते हैं।
आपकी जन्मपत्रिका में राहु-केतु की स्थिति के अनुसार निम्नलिखित 12 प्रकार के कालसर्प दोषों का वेदोक्त शांति विधान किया जाता है:
| प्रमुख अनुष्ठान (Main Ritual) | शुद्ध चांदी के नाग-नागिन प्रतिष्ठा, राहु-केतु वेदोक्त जाप एवं पूर्णाहुति हवन |
|---|---|
| वस्त्र नियम (Dress Code) | पुरुष: धोती-कुर्ता या शुद्ध कुर्ता-पायजामा। महिलाएं: साड़ी या सलवार सूट (काले व हरे रंग से परहेज करें) |
| दक्षिणा व सामग्री (Dakshina & Samagri) | जन्म कुंडली व गोत्र अनुसार पूजन सामग्री एवं दक्षिणा की पूरी जानकारी हेतु पंडित जी से सीधे कॉल पर बात करें |
हम किसी भी प्रकार के भय या अंधविश्वास के बिना केवल शास्त्रोक्त वैदिक अनुष्ठान संपन्न कराते हैं। कोई भी सच्चा ब्राह्मण चमत्कार का अनुचित दावा नहीं करता; वैदिक पूजा से ग्रह जनित उग्रता शांत होकर आत्मिक शांति व उन्नति प्राप्त होती है।
स्कंद पुराण एवं मत्स्य पुराण के अनुसार, उज्जैन का श्री मंगलनाथ मंदिर मंगल ग्रह (अंगारक) की प्राकट्य स्थली माना गया है। कर्क रेखा पर स्थित होने के कारण यह मंदिर संपूर्ण विश्व में मंगल दोष शांति का सर्वोच्च केंद्र है।
भात (पके चावल) का भोग क्यों? मंगल ग्रह उग्र एवं अग्नि तत्व प्रधान ग्रह हैं जो रक्त, क्रोध व ऊर्जा का कारक हैं। पका हुआ भात (चावल) शीतल, सात्विक एवं चंद्रमा का प्रतीक है। शिवलिंग पर भात अर्पण करने से मंगल की उग्रता शांत होती है और वैवाहिक सुख प्राप्त होता है।
| पूजा विधि (Vidhi) | अभिषेक, भात पूजन, कुमकुम अर्चन, नवग्रह शांति एवं मंगल स्त्रोत पाठ |
|---|---|
| दक्षिणा परामर्श (Dakshina Guidance) | पूजा बुकिंग एवं दक्षिणा विवरण हेतु पंडित जी से संपर्क करें |
कुंडली के 1 (लग्न), 4, 7, 8 अथवा 12वें भाव में मंगल स्थित होने पर मांगलिक दोष बनता है। वैदिक ज्योतिष में इसे भयभीत होने का विषय नहीं बल्कि मंगल की ऊर्जा को संतुलित करने का मार्ग माना गया है।
सटीक मुहूर्त एवं उपाय जानने हेतु कृपया अपना जन्म दिनांक, जन्म समय, जन्म स्थान एवं गोत्र तैयार रखें और पंडित जी को कॉल या व्हाट्सएप पर साझा करें।
4-Step Simple Booking Process — प्रथम परामर्श से लेकर उज्जैन में वैदिक अनुष्ठान संपन्न होने तक
फ़ोन कॉल या व्हाट्सएप (+91 77229 58543) द्वारा सीधे संपर्क करें। अपना नाम, गोत्र एवं पूजा का नाम बताएं।
पंडित जी पत्रिका का अवलोकन कर शास्त्र सम्मत पूजा विधि एवं सर्वोत्तम शुभ मुहूर्त निर्धारित करते हैं।
पूजा का निश्चित दिन, समय एवं दक्षिणा की पूरी स्पष्टता से पुष्टि करें।
उज्जैन पधारकर पंडित जी के सान्निध्य में विधि-विधान से पूजा पूर्ण कर भगवान महाकाल का आशीर्वाद प्राप्त करें।
Why Devotees Trust Us — उज्जैन की प्राचीन तीर्थ परंपरा, शुद्ध वेदोक्त रीति, पारदर्शी आचरण एवं आत्मीय मार्गदर्शन।
किसी भी प्रकार के बिचौलिए, दलाल या एजेंसी के बिना आप सीधे पूजा कराने वाले विद्वान वैदिक पंडित जी से बात करते हैं।
हम यजमानों को ग्रहों का डर दिखाकर अनुचित दावा या अंधविश्वास नहीं फैलाते, बल्कि वैदिक शांति व समाधान बताते हैं।
उज्जैन आगमन पर धर्मशाला व्यवस्था, मंदिर दर्शन समय एवं पूजा नियमों की संपूर्ण जानकारी दी जाती है।
उज्जैन के प्रतिष्ठित वैदिक ब्राह्मण वंश से संबद्ध, पंडित जी शुक्ल यजुर्वेद परंपरा, नवग्रह शांति, महाकाल रुद्राभिषेक, कालसर्प दोष एवं मंगल भात पूजा के विशेषज्ञ हैं। सभी अनुष्ठान पूर्ण शुचिता, वेदोक्त संकल्प एवं शास्त्रीय मर्यादा के साथ संपन्न कराए जाते हैं।
Authentic Puja Ceremonies Gallery — उज्जैन में पंडित जी द्वारा संपन्न वैदिक कालसर्प दोष, मंगल भात एवं नवग्रह शांति अनुष्ठान
यजमान परिवार सहित वेदोक्त कलश स्थापना, नाग देवता प्रतिष्ठा एवं संकल्प विधान।
पवित्र धान्य मंडल, नारियल कलश एवं वेदोक्त मंत्रोच्चार सहित पारिवारिक पूजा।
वैवाहिक बाधा निवारण व सुख-शांति हेतु शास्त्रोक्त पूजन एवं ब्राह्मण आशीर्वाद।
उज्जैन सिद्ध पीठ पर विधिपूर्वक कलश पूजन, दीपदान एवं वैदिक शांति कर्म।
पवित्र तीर्थ पर पूजा समाप्ति पश्चात यजमानों पर मंगल पुष्प वर्षा एवं रक्षा सूत्र बंधन।
Frequently Asked Questions — उज्जैन में वैदिक पूजा से संबंधित यजमानों के सामान्य प्रश्नों के स्पष्ट उत्तर
शुभ मुहूर्त, शास्त्र सम्मत वैदिक विधि एवं पारदर्शी दक्षिणा की संपूर्ण जानकारी प्राप्त करें। प्रतिदिन प्रातः 08:00 AM से रात्रि 10:00 PM तक संपर्क योग्य।